Google Panda Algorithm update क्या है?

गूगल हर साल अपने algorithms में हजारों अपडेट्स करता है । जिससे कि यूजर्स को बेहतर और अच्छे क्वॉलिटी कंटेंट provide किया जा सके । गूगल के 200 से भी ज्यादा रैंकिंग algorithms फैक्टर्स हैं । जो किसी वेबसाइट की रैंकिंग डिसाइड करने का काम करती है ।

इन्ही algorithms में से हम आपको इस आर्टिकल में गूगल के ही एक पॉपुलर एल्गोरिथम के बारे में जानकारी देने वाले हैं । कि आखिर गूगल का Panda Algorithm क्या है? और कैसे काम करता है । 

Google Panda Algorithm kya hai

Google Panda Algorithm क्या है? ( What is Google Panda )

गूगल panda algorithm 24 फरवरी, 2011 को लॉन्च की गयी थी । यह पूरी तरह से वेबसाइट के कंटेंट से रिलेट करता है । वेबसाइट में किस तरह का कंटेंट होना चाहिए? कंटेंट की क्वॉलिटी कैसी होनी चाहिए आदि बातों को गूगल का यह एल्गोरिथम चेक करता है ।  ये एक फिल्टर की तरह किसी आर्टिकल पर काम करता है ।

आज के समय में गूगल का Panda Algorithm एक बहुत ही पॉपुलर रैंकिंग फैक्टर के तौर पर जाना जाता है । यह एल्गोरिथम किसी वेबसाइट पर real-time में प्रभावी नहीं होता है । रियल टाइम कहने का मतलब यह है कि जब किसी वेबसाइट में पोस्ट पब्लिश होती है तो वह पहले index होती है । और फिर बाद में गूगल के बोट्स द्वारा समय-समय पर crawl की जाती है । 

जब गूगल के बोट्स किसी आर्टिकल को crawl करते हैं । उस समय गूगल का यह एल्गोरिथम अपना काम करता है । वह किसी आर्टिकल की क्वॉलिटी के साथ साथ आर्टिकल की क्वांटिटी को चेक करता है । इसके बाद यह एल्गोरिथम आर्टिकल को उसकी क्वॉलिटी के आधार पर एक रैंक देता है । फिर आगे की रैंकिंग प्रक्रिया गूगल के बाकी एल्गोरिथम द्वारा पूरी की जाती है । 

यह तो बात हो गई कि गूगल Panda Algorithm क्या है? और कैसे काम करता है । अब हम आपको गूगल पांडा से बचे रहने के लिए क्या करना चाहिए? के बारे में जानकारी देंगे । जिससे कि आपकी साइट गूगल के इस रैंकिंग फैक्टर से effect न हो ।


हममें नीचे कुछ पॉइंट्स बताएं हैं । जिसे कि हमें अपने वेबसाइट में कभी भी यूज नहीं करनी चाहिए । ये पॉइंट्स गूगल के panda algorithm द्वारा बिल्कुल भी पसंद नहीं की जाती है । साथ ही यह हमारी वेबसाइट के लिए बिल्कुल भी अच्छी नहीं होती है ।

Poor User Experience: Poor User Experience कहने का मतलब यह है कि जिससे यूजर्स का सर्च एक्सपीरियंस किसी भी तरह से खराब न हो । गूगल के इस एल्गोरिथम के लिए यूजर्स का एक्सपीरियंस बहुत ज्यादा महत्व रखता है । 

जिस भी तरह के techniques और कंटेंट्स यूजर्स के हिसाब से नहीं होते हैं । जो यूजर्स के क्वेरी के रिलेवेंट नहीं होते हैं । उसे गूगल का ये एल्गोरिथम फिल्टर करता है । और यूजर्स को बेस्ट पॉसिबल रिजल्ट्स बहुत ही कम समय में देने की कोशिश करता है । जो कि पूरी तरह से यूजर्स के क्वेरी के रिलेवेंट होती है ।

ऐसे बहुत से तरीके हैं जो कि किसी वेबसाइट को जल्दी रैंक कराने के लिए किया जाता है । जिससे कि यूजर्स का एक्सपीरियंस खराब होता है । और जो यूजर्स के लिए अच्छी नहीं होती है ।

जैसे अगर कोई यूजर सर्च इंजन में "best mobile" कीवर्ड सर्च करता है । और सर्च करने पर यूजर को SERP में बहुत सारे रिजल्ट्स देखने को मिलती है । जिनमें से वह यूजर किसी एक रिजल्ट्स पर क्लिक करता है । और जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करता है कि उसके लिए बेस्ट मोबाईल कौन से हैं?

जब यूजर किसी एक रिजल्ट पर क्लिक करके उसके वेबसाइट पर जाता है । और यूजर को वह साइट किसी दुसरे टॉपिक जैसे fitness वाली मिलती है । तो सीधी सी बात है कि यूजर उस साइट से तुरन्त वापस आ जाएगा । क्योंकि वह साइट उस यूजर के relevant नहीं है । ये भी यूजर्स के अनुभव को खराब करने का काम करती है ।

ऐसा black hat techniques की मदद से की जाती है । जिसमें वेबसाइट को किसी गलत कीवर्ड पर रैंक कराया जाता है । यह बिल्कुल भी हमारी साइट के लिए अच्छी नहीं होती है । साथ ही गूगल भी इन techniques को बिल्कुल भी पसंद नहीं करता है ।

इसके साथ ही अगर यूजर को किसी वेबसाइट का आर्टिकल समझ में नहीं आता है । आर्टिकल का फॉर्मेट सही नहीं होता है । और यूजर को साइट के एक पेज से दुसरे पेज में जाने में परेशानी होती है । तो इसे भी गूगल का panda algorithm अच्छा नहीं मानता है । इससे भी यूजर्स का अनुभव खराब होता है ।


Duplicate Content: जब हम अपनी वेबसाइट में किसी दुसरे की वेबसाइट का कंटेंट कॉपी/पेस्ट करते हैं तो सामान्यता हमें duplicate content जैसी प्रॉब्लम फेस करनी पड़ती है । यह भी एक गलत SEO प्रेक्टिस है कि हम अपने साइट में किसी दुसरे का कंटेंट यूज करें । उसे पब्लिश करें । 

कई बार तो हमें हमारे खुद के ही साइट पर हमारे ही कंटेंट के duplicate हो जाने की समस्या हो जाती है । हालांकि इसके लिए हम अपने आर्टिकल में canonical tag का इस्तेमाल करते हैं । Canonical tag वेबसाइट के साथ साथ वेबसाइट के कंटेंट के लिए भी इस्तेमाल में लाया जाता है । इस टैग की मदद से हम गूगल को अपने main वेबसाइट और main कंटेंट का हिंट देते हैं ।


Plagiarised Content: Plagiarised Content और duplicate content दोनों आपस में एक दुसरे से काफी मिलते जुलते हैं । और लगभग एक जैसे ही होते हैं । जब हम अपनी वेबसाइट के कंटेंट को plagiarism checker tool में डालते हैं तो हमारा कंटेंट कुछ plagiarised दिखाई देता है । 

ऐसा प्रायः हमें तब दिखाई देता है जब हम किसी दुसरे के कंटेंट को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करते हैं । इससे भी गूगल के panda algorithm की नजर हमारे साइट पर जाती है । और वो इसे गलत मानता है । और इस तरह से हमारा आर्टिकल कभी भी SERP ( Search Engine Results Pages ) में रैंक नहीं कर पाता है । 


Thin Content: हमें हमेशा ही यह कोशिश करनी चाहिए कि हमारा एक आर्टिकल कम से कम 800 वर्ड्स में लिखी हुई हो । जिससे कि यूजर्स हमारे साइट पर कुछ समय के लिए रुके । और हमारे कंटेंट्स को पढ़ें । ऐसा तभी होगा जब हमारे आर्टिकल की length बड़ी होगी । और जिसमें यूजर्स के लिए अच्छी जानकारियां लिखी हुई होगी ।

अगर यूजर्स आपके आर्टिकल को बहुत ही कम समय में पढ़ लेता है । और आपकी वेबसाइट से तुरन्त वापस आ जाता है । तो गूगल को यह लगेगा कि आपके द्वारा लिखा गया कंटेंट यूजर्स को पसंद नहीं आ रहा है । इसलिए वे तुरन्त ही अपकी साइट से वापस जा रहे हैं । 

इसलिए कोशिश करें कि आपके आर्टिकल की length थोड़ी बड़ी हो और साथ ही वह यूजर्स को अच्छी और पूरी जानकारी देने के लिए लिखी गई हो । जो यूजर्स के क्वेरी को अच्छी तरह से fulfill करती हो । 


Keywords Stuffing: जब हम अपने आर्टिकल में जरूरत से ज्यादा अपने main keyword को यूज करते हैं तो सामान्यता हमें keywords stuffing की समस्या होती है । ऐसा मुख्य रूप से अपने आर्टिकल को गूगल में जल्दी रैंक कराने के मकसद से किया जाता है ।

ऐसा करने से हमारे आर्टिकल की क्वॉलिटी कम हो जाती है । जरूरत से ज्यादा एक ही कीवर्ड का यूज एक आर्टिकल को प्राकृतिक तरीके से यूजर्स के सामने प्रस्तुत नहीं करती है । यह गूगल के साथ साथ यूजर्स को भी अच्छी नहीं लगती है । इसलिए हमें अपने आर्टिकल में जरूरत से ज्यादा अपने main कीवर्ड को यूज नहीं करनी चाहिए । 

ये वो कुछ पॉइंट्स हैं जो कि आज बहुत से नए ब्लॉगर्स द्वारा यूज में लायी जाती है । जो कि गलत है । इसे गूगल का panda algorithm चेक करता है । जो कि मुख्य रूप से कंटेंट्स की क्वॉलिटी को चेक करने के लिए डिजाइन किया गया है । 


निष्कर्ष

इस पोस्ट में हमने आपको गूगल के एक सबसे ज्यादा चर्चित एल्गोरिथम Google Panda के बारे में जानकारी दी । जिसमें हमनें आपके बताया कि गूगल का यह एल्गोरिथम किस तरह से किसी वेबसाइट के आर्टिकल को चेक करता है । और कैसे काम करता है ?

गूगल के एल्गोरिथम आज बहुत ही ज्यादा advanced हो चुके हैं । और साथ ही ये algorithms लगातर अपडेट भी होते रहते हैं । जिससे कि किसी भी तरह की गलत techniques काम में न आए । किसी भी तरीके की स्पैमिंग न हो । और यूजर्स को अच्छा और फायदेमंद कंटेंट बहुत ही कम समय में provide किया जा सके ।

हम आशा करते हैं कि आपको हमारी पोस्ट Google Panda Algorithm update क्या है? और कैसे काम करता है? से अच्छी जानकारी प्राप्त हुई होगी । अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो आप हमें कमेंट कर सकते हैं । हमें अच्छा लगेगा ।

धन्यवाद


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